अतीत के कर्म ही वर्तमान को निर्धारित करते हैं

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रांची : आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन की शुरुआत हरमू रोड स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में हुई। 24 घटे अखंड कीर्तन बाबा नाम केवलम से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। सम्मेलन में बिहार, झारखंड, बंगाल, असम और भारत के विभ्नि्न राज्यों से हजारों आनंदमार्गी और तकरीबन 500 संन्यासी और सन्यासिन भाग ले रहे हैं।

सामूहिक साधना से प्रारंभ

धर्म महासम्मेलन की शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक साधना से हुई। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के अध्यक्ष और आनंद मार्ग के पुरोधा प्रमुख आचार्य किंशुक रंजन सरकार ने भक्तों को संबोधित किया। आचार्य किंशुक रंजन सरकार ने संबोधित करते हुए कह कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य है ईश्वर की प्राप्ति। किसी के अंदर छिपी हुई भक्ति और जीवन को पवित्र और आध्यात्मिक बनाने की प्रबल शक्ति ही महत्वपूर्ण तत्व है। उसके बाद की सारी व्यवस्था ईश्वर स्वयं कर देते हैं। श्री आनंदमूर्तिजी के प्रवचन को सारगर्भित ढंग से समझाया। कहा कि रत्‍‌नाकर, अंगुलिमल जैसे भयानक अपराधी भी संत बन सकते हैं, तब सामान्य इंसान क्यों नहीं? इन्होंने अपने जीवन में न जाने कितने अपराध किए, लेकिन भगवान की शरण में आकर परम भक्त बन गए और सर्वोत्तम मनुष्य के रूप में प्रतिष्ठित हुए। जब ऐसे अपराधी भी इतने अल्प समय में एक पवित्र आध्यात्मिक मनुष्य बन सकते हैं, तब कोई कारण नहीं है दूसरा न बने। सभी स्त्री-पुरुष ईश्वर की यह कृपा प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य ने आगे कहा, मनुष्यों को केवल वह कर्म करना है, जो ईश्वर को आनंद देता है। ईश्वर कभी भी पापी और पुण्यात्मा के बीच भेद नहीं करता है। अनेक दोषों और गलतियों के बावजूद मनुष्य दैवी प्राणी है। प्रत्येक वस्तु ही दैवी सृष्टि है और सभी में एक दिन पूर्णता प्राप्त करने की संभावना है। हम अभी जो कुछ हैं, वह हमारे पूर्व के विचारों और कमरें का परिणाम है और भविष्य में हम जो कुछ होंगे, वह हमारे पूर्व के विचारों और कमरें का परिणाम होगा। हमारे अतीत का कर्म ही हमारे वर्तमान को निर्धारित करता है और हमारे वर्तमान के विचार और कर्म ही हमारे भविष्य को निर्धारित करते हैं। आचार्य ने कहा, ईश्वर के प्रति गहन भावना की निरंतरता उसे आध्यात्मिक आनंद में विभोर कर देता है। प्रत्येक साधक, चाहे उसका अतीत कितना भी मलिन और निंदनीय क्यों न रहा हो, आध्यात्मिक अनुभूति को प्राप्त करने का अधिकारी है।

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